Tuesday, 12 March 2013

चेहरा तो दिखाने आया ..............

वो मुझसे मिलने जो आया एक क़र्ज़ था उतारने आया ...
मैं अर्जियां लेकर गया था वो फरमान सुनाने आया ...

मैं सितारों की तरह करता ही रहा  इंतज़ार रात भर ..
वो चाँद जो आया तो आफताब दिखाने आया ...

दीवाना हूँ मैं मानता भी हूँ ...
मैं ज़माने को बताने निकला वो मुझसे ही छुपाने आया ..

ये आग का ही दरिया है कबूल कर ...
जब भी तैरना चाहा ये जलाने आया ...

कैसे कहूँ की आशिकी जन्नत नसीब करती है ..
जब भी करी इबादत तो बस रुलाने आया ...

होगा कोई फरिस्ता जो मोहब्बत में हंस लिए ...
किस्मत के मारे थे हम जब भी आया तो सताने आया ...

फिर भी इसे कहो मोहब्बत की जीत ही ...
जो रुठा हुआ था कब से वो चेहरा तो दिखाने आया ..............

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