Sunday, 18 November 2012

दिल्ली

देख अब कैसी हुकूमत है तेरी दिल्ली में ए ग़ालिब 
यहाँ पिंजड़े मैं पंछी है, चमन में काफ़िर रहते है।।।
जहाँ पर मीर रहते थे जहाँ ग़ालिब रहा करते ,
वहां अब कैद बुलबुल है रिहा सैय्याद  रहते है।।।
ठिठुरता है जहाँ ये देश पूरा कपकपी लेकर,

वहां मखमल के चादर में राजा राज करते है
जाने लोग कितने हैं जो भूखे ही हैं सो जाते,
पर दिल्ली में ये राजा अक्सर भोज करते हैं।

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